Weather Update January 2026: जनवरी का महीना आमतौर पर कड़ाके की ठंड और साफ मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उत्तर भारत में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कई राज्यों में बादल छा गए हैं और बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि की भी संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के ताजा संकेतों के अनुसार 27 और 28 जनवरी को उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम बिगड़ा रह सकता है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है और इसका असर क्यों पड़ता है
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी प्रणाली है, जो भूमध्यसागर के आसपास बनती है और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचती है। सर्दियों के मौसम में यही सिस्टम उत्तर भारत में बारिश, पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ाने का मुख्य कारण बनता है। इस बार पाकिस्तान और पंजाब की ओर से आने वाली नम हवाओं ने वातावरण में नमी बढ़ा दी है, जिसके चलते बादलों ने तेजी से डेरा डाल लिया है।
किन राज्यों में होगी बारिश और बौछारें
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी होगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। खुले इलाकों में तेज हवा चलने से ठंड और गलन का एहसास और अधिक बढ़ सकता है।
पिछले दिनों की धूप के बाद अचानक बदलाव
बीते 23 जनवरी के बाद से उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ था और दिन में अच्छी धूप निकल रही थी। लोगों को लगा कि ठंड अब धीरे-धीरे विदा ले रही है, लेकिन 26 जनवरी की दोपहर से मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। आसमान में घने बादल छा गए और सूरज पूरी तरह ओझल हो गया। इस बदलाव ने एक बार फिर सर्द हवाओं को तेज कर दिया है, जिससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है।
तापमान में गिरावट और बढ़ेगी ठिठुरन
बारिश और बादलों के कारण दिन और रात के तापमान में कमी दर्ज की जा सकती है। धूप न निकलने से अधिकतम तापमान नीचे जाएगा, वहीं बारिश के बाद नमी बढ़ने से गलन भी ज्यादा महसूस होगी। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। गर्म कपड़ों का उपयोग और ठंडी हवा से बचाव बेहद जरूरी होगा।
किसानों के लिए बेहद अहम समय
जनवरी का अंत किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय रबी फसलों की बढ़वार का चरण चल रहा होता है। गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें खेतों में अच्छी स्थिति में होती हैं और सही समय पर सिंचाई, खाद और दवाओं का छिड़काव किया जाता है। ऐसे में अचानक बारिश और ओलावृष्टि की आशंका किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
छिड़काव और कृषि कार्यों में बरतें सावधानी
यदि आपके क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं या मौसम विभाग ने बारिश की संभावना जताई है, तो अगले दो दिनों तक किसी भी तरह का कीटनाशक या दवा का स्प्रे करने से बचना चाहिए। बारिश के दौरान या उससे ठीक पहले किया गया छिड़काव बेकार चला जाता है, क्योंकि पानी के साथ दवा धुल जाती है और फसल को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
28 जनवरी के बाद मौसम में सुधार की उम्मीद
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 28 जनवरी के बाद पश्चिमी विक्षोभ का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा। 29 और 30 जनवरी को मौसम फिर से साफ होने की संभावना है और धूप निकल सकती है। यही समय होगा जब किसान दोबारा अपनी फसलों में खाद, पानी और आवश्यक स्प्रे का काम कर सकते हैं। साफ मौसम में किया गया कृषि कार्य अधिक प्रभावी होता है।
फसलों की सही देखभाल क्यों है जरूरी
इस समय गेहूं, चना और सरसों की फसलों में संतुलित बढ़वार बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। कई बार अधिक नमी और अनुकूल मौसम के कारण फसल जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगती है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार फसल की अधिक बढ़वार को नियंत्रित करने के लिए पीजीआर (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर) का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसका छिड़काव केवल साफ और सूखे मौसम में ही करना चाहिए।
बारिश के दौरान स्प्रे करने से क्या नुकसान होता है
बारिश या तेज हवा के समय किया गया स्प्रे न केवल बेअसर होता है, बल्कि इससे फसल को नुकसान भी पहुंच सकता है। दवा मिट्टी में बह जाती है, जिससे जड़ों पर गलत असर पड़ सकता है। इसके अलावा किसान को दवा और श्रम दोनों का नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही कोई भी कृषि निर्णय लेना समझदारी भरा कदम है।
अगले 48 घंटे क्यों हैं संवेदनशील
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 48 घंटे उत्तर भारत के लिए काफी संवेदनशील रहने वाले हैं। इस दौरान अचानक बारिश, तेज हवाएं और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की स्थिति बन सकती है। तापमान में गिरावट के साथ-साथ ठंड और गलन बढ़ेगी। लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए और मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
किसानों के बीच जानकारी साझा करना जरूरी
किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम से जुड़ी इस जानकारी को अन्य किसान भाइयों के साथ भी साझा करें। समय रहते सही निर्णय लेने से फसलों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। सामूहिक जागरूकता से न केवल आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है, बल्कि बेहतर उत्पादन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
जनवरी के अंत में बदला हुआ मौसम यह संकेत दे रहा है कि प्रकृति के मिजाज को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत में बारिश और ठंड का नया दौर शुरू हो सकता है। आम लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है। मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही दैनिक और कृषि कार्य करने से नुकसान से बचा जा सकता है और आने वाले दिनों में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।









