Weather Alert Update 2026: आज 27 जनवरी 2026 है और गणतंत्र दिवस के तुरंत बाद उत्तर भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञानियों के पूर्वानुमान के अनुसार, एक नया और काफी प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसने पहाड़ी राज्यों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी मौसम की चाल बदल दी है। बीते एक-दो दिनों से उत्तर भारत के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही तेज हो गई थी और अब इसका असर बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी के रूप में सामने आने लगा है।
यह पश्चिमी विक्षोभ न केवल तापमान में उतार-चढ़ाव ला रहा है, बल्कि किसानों, यात्रियों और आम जनजीवन पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। आने वाले 72 घंटे मौसम के लिहाज़ से काफी अहम माने जा रहे हैं।
पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का दौर
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में अलर्ट
उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में आज और अगले एक-दो दिनों तक भारी हिमपात की संभावना जताई गई है। जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी तेज हो सकती है, जिससे तापमान और नीचे जाएगा। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे क्षेत्रों में बर्फ की मोटी परत जमने की आशंका है।
उत्तराखंड की बात करें तो उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे पहाड़ी जिलों में बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे जहां पर्यटकों के लिए नज़ारे बेहद आकर्षक होंगे, वहीं भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान प्रभावित
मैदानी क्षेत्रों में भी इस पश्चिमी विक्षोभ का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पंजाब और हरियाणा में आज गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। बारिश के कारण प्रदूषण के स्तर में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन तापमान में कमी से ठंड और बढ़ेगी।
राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिलों जैसे जयपुर, अलवर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां देखी जा सकती हैं। यहां के किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है, क्योंकि ओलावृष्टि सरसों और गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में बदलेगा मौसम
पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ेगा सिस्टम
उत्तर प्रदेश में आज पश्चिमी हिस्सों में बारिश की प्रबल संभावना है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, झांसी और आसपास के जिलों में गरज के साथ वर्षा हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
28 जनवरी को यह मौसम प्रणाली आगे बढ़ते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकती है। वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बस्ती और गोंडा जैसे जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने के संकेत हैं। लंबे समय से शुष्क मौसम झेल रहे इलाकों को इससे कुछ राहत मिल सकती है।
बिहार में भी मौसम करवट ले सकता है। चंपारण, सिवान, पटना और आसपास के क्षेत्रों में 28 जनवरी को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि झारखंड और पश्चिम बंगाल के अधिकांश हिस्सों में मौसम फिलहाल शुष्क बने रहने के आसार हैं।
ठंड का नया दौर और पाले की चेतावनी
तापमान में आएगी तेज गिरावट
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 28 जनवरी की शाम के बाद जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ आगे निकल जाएगा, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं एक बार फिर से सक्रिय हो जाएंगी। इसके चलते उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।
29 जनवरी से राजस्थान के कई जिलों में पाले की आशंका जताई गई है। मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी हल्की बूंदाबांदी के बाद ठंड बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में शीतलहर और घने कोहरे का प्रभाव दोबारा देखने को मिल सकता है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की संभावना है।
सराफा बाजार में उथल-पुथल
सोने-चांदी की कीमतों ने बनाए नए रिकॉर्ड
जहां एक ओर मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सराफा बाजार से भी बड़ी खबर सामने आई है। आज सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है। सोने के भाव ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गए हैं, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के चलते कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल आया है, जिससे आभूषण कारोबारियों और ग्राहकों के बीच चर्चा का माहौल बना हुआ है।
किसानों के लिए अहम कृषि सलाह
फसलों की सुरक्षा पर दें विशेष ध्यान
आने वाले 72 घंटे किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। बारिश और ओलावृष्टि के दौरान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि फसलें पानी में डूबकर खराब न हों। जिन इलाकों में ओले गिरने की आशंका है, वहां तैयार फसलों को यथासंभव सुरक्षित रखने के उपाय करें।
29 जनवरी से संभावित पाले को देखते हुए सरसों, आलू और सब्जी की फसलों को ढकने या सिंचाई के माध्यम से पाले से बचाने की सलाह दी जाती है। किसान भाई मौसम के ताज़ा पूर्वानुमान के आधार पर ही सिंचाई, कटाई और अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
निष्कर्ष
यह मौसम अपडेट मौजूदा उपग्रह आंकड़ों और मौसम विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित है। मौसम की स्थिति में अचानक बदलाव संभव है, इसलिए आम नागरिकों, यात्रियों और किसानों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी ताज़ा दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। आने वाले दिनों में सतर्कता और सही योजना से मौसम के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।









