Weather Alert 72 Hours: उत्तर भारत का मौसम एक बार फिर अपनी पुरानी रफ्तार में लौट आया है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक, ठंड, बारिश और बर्फबारी का ऐसा संगम बनने जा रहा है जो फरवरी की शुरुआत को यादगार बना देगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अलर्ट के मुताबिक एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, जिसका असर अगले 72 घंटों तक देश के कई हिस्सों में साफ नजर आएगा। यह वही समय है जब सर्दी आखिरी दांव खेलती है और प्रकृति याद दिलाती है कि मौसम को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ की वापसी: मौसम के खेल का असली खिलाड़ी
पश्चिमी विक्षोभ को अगर मौसम का पुराना उस्ताद कहा जाए तो गलत नहीं होगा। दशकों से यही सिस्टम उत्तर भारत में सर्दी, बारिश और बर्फबारी का मिजाज तय करता आया है। इस बार भी वही कहानी दोहराई जा रही है, लेकिन तीव्रता कुछ ज्यादा है। IMD के अनुसार यह विक्षोभ अफगानिस्तान और पाकिस्तान क्षेत्र से होते हुए जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। इसके साथ नमी और ठंडी हवाओं का मेल पहाड़ी इलाकों में भारी हिमपात और मैदानी राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश ला रहा है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का अलर्ट
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी अपने पूरे शबाब पर रहेगी। गुलमर्ग, सोनमर्ग, कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे क्षेत्रों में अगले तीन दिनों तक रुक-रुक कर भारी हिमपात की चेतावनी जारी की गई है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में भी बर्फ की मोटी चादर बिछने की पूरी संभावना है। पहाड़ों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों को सचेत रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि बर्फबारी के चलते सड़कें बंद होने, भूस्खलन और बिजली आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहेगा।
मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि का कहर
मैदानों में मौसम का मिजाज भी शांत नहीं रहेगा। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में बादल पूरी तरह छाए रहेंगे और गरज के साथ बारिश के आसार हैं। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हो सकती है, जो फसलों और वाहनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिलों—जयपुर, अलवर, श्रीगंगानगर और भरतपुर—में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा, मथुरा और झांसी में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। धीरे-धीरे यह सिस्टम पूर्व की ओर बढ़ेगा और बिहार तथा झारखंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी।
तापमान में तेज गिरावट और शीतलहर की दस्तक
बारिश और बर्फबारी के बाद असली असर तापमान पर पड़ेगा। उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं मैदानों में प्रवेश करेंगी, जिससे न्यूनतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है। राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शीतलहर की स्थिति बन सकती है। रातें ज्यादा ठंडी होंगी और सुबह-शाम कोहरा फिर से जनजीवन को प्रभावित करेगा। बुजुर्गों और बच्चों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि ठंड से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
किसानों के लिए अलर्ट और जरूरी सलाह
यह मौसम किसानों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है। सरसों, गेहूं और सब्जियों की फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं। बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की आशंका को देखते हुए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करना जरूरी है। पाले से बचाव के लिए रात के समय हल्की सिंचाई और धुआं करने जैसे पारंपरिक उपाय आज भी उतने ही कारगर हैं, जितने पहले हुआ करते थे। मौसम को देखकर ही सिंचाई और कटाई जैसे निर्णय लेना समझदारी होगी।
यात्रियों और पर्यटकों के लिए जरूरी चेतावनी
पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए यह समय रोमांचक जरूर है, लेकिन जोखिम से भरा भी है। भारी बर्फबारी के कारण कई सड़क मार्ग अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। प्रशासन की सलाह है कि बिना जरूरत यात्रा से बचें और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें। पुराने लोग कहा करते थे—पहाड़ सुंदर होते हैं, पर उनका मिजाज पल में बदल जाता है। यह बात आज भी उतनी ही सच है।
अगले 72 घंटे क्यों हैं बेहद अहम
मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले तीन दिन उत्तर भारत के लिए निर्णायक होंगे। इसी दौरान बारिश, बर्फबारी और तापमान में गिरावट का पूरा असर दिखेगा। इसके बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा, लेकिन ठंड का असर कुछ दिन और बना रह सकता है। यह वह समय है जब सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
निष्कर्ष: प्रकृति का संकेत समझना जरूरी
मौसम हर साल बदलता है, लेकिन उसका संदेश वही रहता है—तैयार रहो। पहाड़ों की बर्फबारी हो या मैदानों की बारिश, यह सब प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है। परंपरागत समझ और आधुनिक मौसम विज्ञान, दोनों को साथ लेकर चलना ही आज की जरूरत है। अगले 72 घंटे सावधानी, समझदारी और धैर्य के हैं। मौसम का यह बदला हुआ रूप याद दिलाता है कि प्रकृति के आगे इंसान आज भी छोटा है, और उसी विनम्रता के साथ हमें उसके हर संकेत को समझना चाहिए।









