नया नियम लागू, इन 5 जरूरी दस्तावेजों के बिना नहीं होगी जमीन रजिस्ट्री, जानिए पूरा नियम Property Registration New Update 2026

By Vidya

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Land Registry Documents: जमीन की खरीद-बिक्री से पहले जानना जरूरी

जमीन या प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए सरकार ने हाल ही में जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के तहत अब कुछ अनिवार्य दस्तावेजों के बिना जमीन की रजिस्ट्री कराना संभव नहीं होगा। सरकार का उद्देश्य भूमि से जुड़े फर्जीवाड़े, बेनामी संपत्तियों और लंबे समय से चले आ रहे विवादों पर लगाम लगाना है। पहले कई मामलों में अधूरे या गलत कागजातों के आधार पर रजिस्ट्री हो जाती थी, जिससे बाद में खरीदार और विक्रेता दोनों को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

नए दिशा-निर्देश लागू होने के बाद अब जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाई जा रही है। प्रशासन चाहता है कि रजिस्ट्री से पहले हर दस्तावेज का सही तरीके से सत्यापन हो, ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद न खड़ा हो। अगर आप भी जमीन खरीदने या बेचने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

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पहचान से जुड़े अनिवार्य दस्तावेज

खरीदार और विक्रेता दोनों की पहचान होगी सत्यापित

नए नियमों के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री के समय सबसे पहले खरीदार और विक्रेता की पहचान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य वैध पहचान पत्र अब अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति फर्जी नाम या गलत पहचान के जरिए रजिस्ट्री न करा सके।

रजिस्ट्री कार्यालय में प्रस्तुत किए गए पहचान पत्रों में नाम, पता, जन्मतिथि और फोटो का मिलान किया जाएगा। अगर किसी भी तरह की असमानता पाई जाती है, तो रजिस्ट्री प्रक्रिया को रोक दिया जा सकता है। सरकार का मानना है कि मजबूत पहचान सत्यापन से बेनामी लेन-देन पर काफी हद तक रोक लगेगी और भूमि रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय बनेंगे।

जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज

भूमि रिकॉर्ड का स्पष्ट और अद्यतन होना जरूरी

जमीन की रजिस्ट्री के लिए स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें खसरा-खतौनी, जमाबंदी, रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (ROR) या भूमि रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रति शामिल होती है। नए नियमों के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया है कि जमीन वास्तव में उसी व्यक्ति के नाम दर्ज हो, जो उसे बेच रहा है।

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अगर भूमि रिकॉर्ड में किसी प्रकार का विवाद, कोर्ट केस, बंधक या सरकारी रोक दर्ज है, तो उस जमीन की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। इससे खरीदार को यह भरोसा मिलेगा कि वह जिस जमीन में निवेश कर रहा है, वह कानूनी रूप से सुरक्षित है। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था से अब पुराने और गलत रिकॉर्ड के आधार पर होने वाली धोखाधड़ी को भी कम किया जा सकेगा।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क से जुड़े दस्तावेज

भुगतान के बिना नहीं होगी रजिस्ट्री

नए नियमों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से जुड़े दस्तावेजों को भी बेहद अहम बनाया गया है। जमीन की रजिस्ट्री से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी सरकारी शुल्कों का पूरा भुगतान किया गया है। इसके लिए ऑनलाइन भुगतान की रसीद या चालान प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

पहले कई मामलों में कम स्टांप ड्यूटी दिखाकर या गलत मूल्यांकन के आधार पर रजिस्ट्री करा ली जाती थी, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता था। अब भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की सख्त जांच के बाद ही रजिस्ट्री आगे बढ़ेगी। इससे न केवल सरकारी आय बढ़ेगी, बल्कि जमीन के लेन-देन की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी बनेगी।

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पैन कार्ड और वित्तीय जानकारी का महत्व

बड़े लेन-देन में पैन कार्ड अनिवार्य

जमीन की खरीद-बिक्री में बड़ी रकम का लेन-देन होता है, इसलिए नए नियमों के तहत पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे आयकर विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि लेन-देन वैध तरीके से हो रहा है या नहीं।

पैन कार्ड के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि काले धन का इस्तेमाल जमीन की खरीद में न हो। अगर किसी पक्ष द्वारा पैन कार्ड प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। यह कदम वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने के लिए उठाया गया है।

एनओसी और स्थानीय अनुमति से जुड़े दस्तावेज

कुछ मामलों में अतिरिक्त कागजात भी जरूरी

नए नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त दस्तावेजों की भी मांग की जा सकती है। जैसे कि शहरी क्षेत्रों में प्लॉट या मकान की रजिस्ट्री के लिए स्थानीय निकाय की अनुमति, विकास प्राधिकरण की एनओसी या निर्माण से जुड़े दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं।

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अगर जमीन किसी विशेष योजना, अधिग्रहण क्षेत्र या प्रतिबंधित इलाके में आती है, तो संबंधित विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इन दस्तावेजों के बिना रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीन का उपयोग नियमों के अनुसार ही किया जाए।

नए नियमों का आम लोगों पर असर

शुरुआत में थोड़ी सख्ती, लेकिन भविष्य में फायदा

नए नियम लागू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले की तुलना में थोड़ी सख्त जरूर हो गई है। शुरुआत में लोगों को दस्तावेज जुटाने और सत्यापन में कुछ परेशानी हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव सभी के लिए फायदेमंद साबित होंगे।

इन नियमों से जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे, फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी और खरीदार का भरोसा बढ़ेगा। साथ ही भूमि रिकॉर्ड ज्यादा व्यवस्थित और सुरक्षित बनेंगे, जिससे कानूनी सुरक्षा भी मजबूत होगी।

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जमीन की रजिस्ट्री से पहले क्या करें

सावधानी और सही जानकारी है सबसे जरूरी

अगर आप जमीन खरीदने या बेचने जा रहे हैं, तो रजिस्ट्री से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों को अच्छी तरह जांच लें। पहचान पत्र, भूमि रिकॉर्ड, टैक्स भुगतान की रसीद और अन्य अनुमतियों को पहले से तैयार रखें। किसी भी तरह की जल्दबाजी या अधूरी जानकारी के साथ रजिस्ट्री कराने से बचें।

सरकार द्वारा लागू किए गए ये नए नियम जमीन के लेन-देन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। सही दस्तावेजों और पूरी जानकारी के साथ की गई रजिस्ट्री न केवल आपको कानूनी परेशानियों से बचाएगी, बल्कि भविष्य में आपकी संपत्ति को भी पूरी तरह सुरक्षित बनाएगी।

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