आ गया है नया पश्रिमी विक्षोभ, 04–05 फरवरी को मौसम लेगा करवट, किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी चेतावनी IMD Weather Alert

By Vidya

Published On:

IMD Weather Alert

IMD Weather Alert: उत्तर भारत में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण 04 और 05 फरवरी के दौरान कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना जताई जा रही है। पिछले कुछ दिनों से जहां दिन में तेज धूप और अपेक्षाकृत साफ मौसम देखने को मिल रहा था, वहीं अब अचानक बादलों की आवाजाही ने ठंड और गलन को फिर से बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं।

Join WhatsApp
Join Now

पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव क्यों है अहम

पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसा मौसमी सिस्टम होता है जो पश्चिम दिशा, विशेषकर पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों से होकर उत्तर भारत में प्रवेश करता है। इसके असर से सर्दियों के मौसम में बारिश, बादल और तापमान में गिरावट देखने को मिलती है। इस बार भी ऐसा ही सिस्टम सक्रिय हो गया है, जिसका असर उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर पड़ने वाला है।

पिछले तीन से चार दिनों से मौसम लगभग साफ बना हुआ था। दिन में तेज धूप निकलने से लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिल रही थी। लेकिन अब पश्चिम से आ रही नमी युक्त हवाओं के कारण आसमान में बादल छाने लगे हैं और मौसम ने अचानक रुख बदल लिया है।

यह भी पढ़े:
Bank of Baroda Recruitment 2026 बैंक ऑफ बड़ौदा में 418 पदों पर बंपर भर्ती, 1 लाख से ज्यादा सैलरी वाली सरकारी बैंक नौकरी के लिए आवेदन शुरू Bank of Baroda Recruitment 2026

इन राज्यों में दिखेगा ज्यादा असर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 04 और 05 फरवरी के दौरान मौसम खराब रह सकता है। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि कहीं-कहीं तेज हवाओं के साथ बौछारें और ओलावृष्टि भी हो सकती है।

विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में यह सिस्टम ज्यादा प्रभावी रहेगा। बादल पाकिस्तान और पंजाब की ओर से प्रवेश कर हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी यूपी की ओर बढ़ेंगे, जिससे लगातार दो दिनों तक धूप निकलने में बाधा आ सकती है।

तापमान में आएगी गिरावट, बढ़ेगी गलन

मौसम में इस बदलाव का सीधा असर तापमान पर भी देखने को मिलेगा। बारिश और बादलों के कारण दिन के तापमान में गिरावट आ सकती है, वहीं रातें और अधिक सर्द महसूस होंगी। ठंडी हवाओं के चलते गलन बढ़ने की संभावना है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

यह भी पढ़े:
SSC MTS Admit Card Out SSC MTS Admit Card 2026 जारी, परीक्षा से पहले अभी डाउनलोड करें अपना एडमिट कार्ड, लिंक यहां देखें SSC MTS Admit Card Out

23 जनवरी के बाद से मौसम लगभग साफ था, लेकिन 26 जनवरी की दोपहर के बाद अचानक हुए बदलाव ने यह संकेत दे दिया कि सर्दी अभी पूरी तरह विदा नहीं हुई है। आने वाले 48 घंटे मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जा रहे हैं।

किसानों के लिए क्यों है यह समय महत्वपूर्ण

रबी फसलों के लिए फरवरी का महीना बेहद अहम होता है। इस समय गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलें बढ़वार की अवस्था में होती हैं। ऐसे में अचानक बारिश और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर यदि किसान पहले से तैयार न हों।

मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आपके क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं या बारिश की संभावना बनी हुई है, तो अगले दो दिनों तक किसी भी प्रकार का कीटनाशक, फफूंदनाशक या पीजीआर (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर) का छिड़काव न करें। बारिश के दौरान किया गया स्प्रे बह जाता है, जिससे न केवल दवा बेकार होती है बल्कि खर्च भी बढ़ जाता है।

यह भी पढ़े:
Income Tax Changes 2026 बजट ने पलट दी टैक्स की तस्वीर, इनकम टैक्स के 10 बदलावों से बदल जाएगा आपका पूरा फाइनेंशियल प्लान Income Tax Changes 2026

सिंचाई और स्प्रे को लेकर क्या रखें ध्यान

इस समय किसानों को सिंचाई और स्प्रे से जुड़े फैसले बहुत सोच-समझकर लेने चाहिए। जिन क्षेत्रों में बारिश की संभावना है, वहां पहले से की गई सिंचाई फसलों में अधिक नमी पैदा कर सकती है, जिससे रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है।

यदि मौसम 28 फरवरी के बाद यानी 29 और 30 जनवरी को साफ होता है, तब किसान खाद, पानी और आवश्यक दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं। साफ मौसम में किया गया स्प्रे अधिक प्रभावी होता है और फसल को सही पोषण मिलता है।

गेहूं, चना और सरसों की फसलों की देखभाल

इस समय गेहूं की फसल में टिलरिंग और बढ़वार का चरण चल रहा होता है। अधिक बढ़वार को संतुलित करने के लिए पीजीआर का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसके लिए मौसम का साफ होना बेहद जरूरी है। इसी तरह चना और सरसों की फसलों में भी फूल और दाने बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जहां अधिक नमी नुकसानदेह साबित हो सकती है।

यह भी पढ़े:
8th Pay Commission Salary 2026 31 जनवरी से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में ऐतिहासिक उछाल, 8वें वेतन आयोग और DA बढ़ोतरी से 3 गुना तक वेतन, देखें पूरी नई लिस्ट 8th Pay Commission Salary 2026

बारिश के दौरान खेतों में जलभराव न होने दें और यदि ओलावृष्टि की आशंका हो तो फसलों के लिए उपलब्ध स्थानीय सुरक्षा उपायों पर भी विचार करें।

आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां

मौसम में बदलाव का असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि आम जनजीवन पर भी पड़ता है। ठंड और गलन बढ़ने से सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में गर्म कपड़े पहनना, सुबह-शाम की ठंडी हवाओं से बचना और आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है।

निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

कुल मिलाकर, आने वाले 48 घंटे उत्तर भारत के लिए मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि जहां एक ओर ठंड बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए नुकसान का कारण भी बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखी जाए और उसी के अनुसार कृषि और दैनिक कार्यों की योजना बनाई जाए।

यह भी पढ़े:
Weather Update 2026 3, 4 और 5 फरवरी को बारिश–बर्फबारी, ठंड का कहर लौटेगा, इन राज्यों में कोहरे का रेड अलर्ट जारी Weather Update 2026

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे इस जानकारी को अन्य किसान भाइयों के साथ भी साझा करें, ताकि समय रहते सभी लोग अपनी फसलों और संसाधनों की सुरक्षा कर सकें और किसी भी प्रकार के आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

Related Posts

Leave a Comment