दिल्ली-NCR में ठंड और बारिश की वापसी! दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय, बर्फबारी-बारिश को लेकर IMD का 7 दिन का ताजा अलर्ट IMD Snowfall Alert

By Vishwaja

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IMD Snowfall Alert

IMD Snowfall Alert: फरवरी का आगाज़ हमेशा से मौसम की चाल बदलने का संकेत देता रहा है। पुराने लोग कहा करते थे—माघ बीतते-बीतते ठंड आख़िरी दांव खेलती है। इस बार भी कुछ वैसा ही नज़ारा बनने जा रहा है। जनवरी के जाते-जाते जिस तरह दिल्ली-एनसीआर में बारिश ने दस्तक दी, उसने साफ कर दिया कि सर्दी अभी पूरी तरह विदा लेने के मूड में नहीं है। अब फरवरी के पहले हफ्ते में लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, जो पहाड़ों से लेकर मैदानों तक मौसम को बेचैन करने वाले हैं। मौसम की यह करवट सिर्फ तापमान नहीं गिराएगी, बल्कि रोज़मर्रा की रफ्तार को भी थोड़ा थाम देगी।

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क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ और क्यों बढ़ जाती है ठंड

पश्चिमी विक्षोभ कोई नई चीज़ नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की सर्दियों की रीढ़ है। दशकों से यही प्रणाली हिमालय की चोटियों पर बर्फ गिराती रही है और मैदानों में ठंडी हवाओं का रास्ता खोलती रही है। जब यह विक्षोभ सक्रिय होता है, तो अरब सागर और भूमध्यसागर से नमी लेकर आता है। नतीजा—पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश, बादल और ठिठुरन। इस बार खास बात यह है कि फरवरी के पहले ही सप्ताह में दो-दो विक्षोभ आ रहे हैं, जो आमतौर पर जनवरी के आखिर या फरवरी के मध्य में देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि मौसम विभाग भी सतर्क है।

दिल्ली-NCR में कैसा रहेगा अगले 7 दिनों का मौसम

दिल्ली और एनसीआर के लोग मौसम के इस बदले रंग को पहले ही महसूस कर चुके हैं। रात की बारिश के बाद ठंड ने फिर से पकड़ मज़बूत कर ली है। मौसम विभाग के अनुसार 1 से 7 फरवरी के बीच दिल्ली-एनसीआर में मौसम लगातार करवट लेता रहेगा। 2 फरवरी को भले ही तेज बारिश की संभावना न हो, लेकिन ठंडी हवाएं पूरे दिन सिहरन पैदा करेंगी। सुबह के वक्त हल्का कोहरा और दिन में 10 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं तापमान को नीचे दबाए रखेंगी। यह वही मौसम है जब धूप दिखती तो है, लेकिन उसमें गर्माहट कम और तंज ज़्यादा होता है।

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5 फरवरी से बदलेगा खेल: दूसरा विक्षोभ देगा दस्तक

मौसम की असली परीक्षा 5 फरवरी से शुरू होगी। दूसरे पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिल्ली-एनसीआर में बादल घिर सकते हैं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बन सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जो फरवरी के लिहाज से थोड़ा कम माना जाता है। हवाओं की रफ्तार 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, लेकिन नमी बढ़ने के कारण ठंड ज्यादा चुभने वाली महसूस होगी। पुराने लोग इसे “हड्डियों में उतरने वाली ठंड” कहते हैं, और सच पूछिए तो यही ठंड सबसे ज़्यादा परेशान करती है।

3 से 7 फरवरी के बीच ठंड और कोहरे का सिलसिला

मौसम विभाग का अनुमान है कि 3 से 7 फरवरी के बीच दिल्ली-एनसीआर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। सुबह के समय हल्के से मध्यम स्तर का कोहरा देखने को मिल सकता है, जो ट्रैफिक और रेल सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। 6 और 7 फरवरी को ठंड में फिर से इज़ाफा होगा, क्योंकि इन दिनों 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सर्द हवाएं चलने की संभावना है। यह वही दौर होता है जब लोग अलमारियों से फिर से मोटे स्वेटर निकालते हैं और सोचते हैं कि सर्दी तो जा चुकी थी, फिर लौट कैसे आई।

पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी से बदलेगा नज़ारा

पश्चिमी विक्षोभ का असली असर पहाड़ों पर दिखेगा। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे इलाकों में अच्छी बर्फबारी की संभावना है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में भी लगातार हिमपात हो सकता है। यह बर्फबारी जहां एक ओर सैलानियों के लिए रोमांच लेकर आती है, वहीं स्थानीय लोगों के लिए चुनौती भी बनती है। सड़कें बंद होना, तापमान का शून्य के आसपास पहुंचना और रोज़मर्रा की जरूरतों पर असर—ये सब पहाड़ी जीवन का हिस्सा हैं, जिसे लोग पीढ़ियों से झेलते आए हैं।

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मैदानी इलाकों पर पहाड़ों की बर्फ का असर

पहाड़ों पर गिरने वाली बर्फ का असर मैदानों तक पहुंचता है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना इसी वजह से बनती है। ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएं तापमान को गिराती हैं और दिन-रात के फर्क को कम कर देती हैं। यही कारण है कि फरवरी के पहले हफ्ते में भी सर्दी का एहसास जनवरी जैसा होने लगता है। यह मौसम किसानों के लिए भी अहम होता है, क्योंकि हल्की बारिश गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

India Meteorological Department का अलर्ट और आम लोगों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। कोहरे और बारिश के कारण दृश्यता कम हो सकती है, इसलिए सुबह और देर रात यात्रा करने वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए ठंड से बचाव ज़रूरी है, क्योंकि यह मौसम अचानक तबीयत बिगाड़ सकता है। सच कहें तो यह वही समय है जब पुराने ज़माने की समझ काम आती है—गरम कपड़े, गरम खाना और बेवजह ठंड में बाहर निकलने से परहेज़।

आगे क्या संकेत दे रहा है मौसम

फरवरी का पहला हफ्ता अगर ऐसा रहा, तो साफ है कि सर्दी अचानक जाने वाली नहीं है। हालांकि जैसे-जैसे पश्चिमी विक्षोभ आगे बढ़ेंगे, उसके बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा और दिन में धूप की तपिश बढ़ेगी। लेकिन फिलहाल उत्तर भारत को ठंड, बारिश और बर्फबारी के इस दौर के लिए तैयार रहना होगा। मौसम का यह मिज़ाज हमें याद दिलाता है कि प्रकृति अपनी चाल खुद तय करती है—हम बस उसके साथ तालमेल बैठा सकते हैं।

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