GST Rate 2026 Latest Update: भारत की कर व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ चुका है। जीएसटी दरों में 2026 के लिए बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है, जिसे सरकार ने “जीएसटी 2.0” के नाम से पेश किया है। इस सुधार का उद्देश्य वही पुराना है—आम आदमी को राहत, व्यापार को गति और व्यवस्था में सादगी। सितंबर 2025 से नई दरें लागू हो चुकी थीं, लेकिन जनवरी 2026 से नियम और अधिक सख्त और स्पष्ट हो गए हैं। इसका असर अब बाजार से लेकर आपकी जेब तक साफ दिखने लगा है।
GST 2.0 क्या है और क्यों लाया गया?
जीएसटी 2.0 दरअसल वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का अगला चरण है। बीते वर्षों में यह महसूस किया गया कि बहुत ज्यादा टैक्स स्लैब होने से उपभोक्ता और व्यापारी दोनों भ्रमित रहते हैं। पहले 0%, 5%, 12%, 18% और 28% जैसे कई स्लैब थे, जिनमें अलग-अलग वस्तुएं बंटी हुई थीं।
अब इस ढांचे को सरल बनाते हुए सरकार ने मुख्य रूप से दो स्लैब रखे हैं—5% और 18%। इसके अलावा केवल लग्जरी और सिन गुड्स के लिए 40% का उच्च टैक्स स्लैब तय किया गया है। 12% और 28% स्लैब को समाप्त कर दिया गया है। इस बदलाव का मकसद टैक्स सिस्टम को पारदर्शी बनाना और अनुपालन को आसान करना है।
रोजमर्रा की कौन-सी चीजें सस्ती हुईं?
जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ता को मिला है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजें अब कम टैक्स के दायरे में आ गई हैं।
दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, जिन पर पहले 12% या 18% तक जीएसटी लगता था, अब 5% स्लैब में शामिल कर दिए गए हैं। इससे घरेलू बजट पर सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।
कृषि क्षेत्र को भी राहत मिली है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि उपकरण अब कम टैक्स में उपलब्ध होंगे, जिससे किसानों की लागत घटेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 33 जीवन रक्षक दवाओं को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा कई मेडिकल उपकरणों और सामान्य दवाओं पर भी टैक्स घटाया गया है।
शिक्षा से जुड़ी सामग्री और सेवाओं को भी जीएसटी से मुक्त रखा गया है, जिससे छात्रों और अभिभावकों दोनों को राहत मिलेगी।
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स पर क्या असर पड़ा?
एक समय था जब कार, बाइक, एसी और टीवी जैसी चीजें 28% टैक्स स्लैब में आती थीं। अब इन्हें 18% स्लैब में लाया गया है।
इस बदलाव से छोटी कारों और मोटरसाइकिलों की कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है। फ्रिज, वॉशिंग मशीन और अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स भी पहले की तुलना में सस्ते हो गए हैं। त्योहारी सीजन में कंपनियां अतिरिक्त छूट भी दे रही हैं, जिससे खरीदारों को दोहरा फायदा मिल रहा है।
कौन-से सामान महंगे हुए?
जहां जरूरी चीजें सस्ती हुई हैं, वहीं लग्जरी और नुकसानदेह वस्तुओं पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। तंबाकू, सिगरेट, शराब जैसे सिन गुड्स अब 40% जीएसटी स्लैब में रखे गए हैं।
कुछ हाई-एंड लग्जरी कारें, महंगे गैजेट्स और प्रीमियम उत्पाद भी इसी श्रेणी में आते हैं। इससे साफ संदेश जाता है कि सरकार विलासिता पर ज्यादा टैक्स लगाकर जरूरी वस्तुओं को सस्ता रखना चाहती है। आम उपभोक्ता पर इसका असर सीमित रहेगा, लेकिन लग्जरी सेगमेंट में कीमतें बढ़ेंगी।
सरकार ने कौन-सी नई सुविधाएं दीं?
केवल टैक्स दरें ही नहीं बदली गईं, बल्कि जीएसटी सिस्टम को भी तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है।
अब जीएसटी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग पहले से कहीं आसान हो गई है। रिफंड प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है, जिससे व्यापारियों को लंबे समय तक पैसे फंसे रहने की समस्या नहीं होगी।
20 लाख रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है, जबकि विशेष राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। इनपुट टैक्स क्रेडिट और लेजर वैलिडेशन के नियम भी सख्त हुए हैं ताकि गलत दावों पर रोक लगे।
बदलाव कैसे लागू होंगे?
नई जीएसटी दरों को लागू करने के लिए दुकानदारों और कंपनियों को अपने बिलिंग सिस्टम और एमआरपी अपडेट करने होंगे। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो चुकी हैं।
ऑटो सेक्टर में पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कंपनियां विशेष ऑफर दे रही हैं। 1 जनवरी 2026 से नियमों का पालन न करने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा, इसलिए व्यापारियों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है।
व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
व्यापारियों को अपने टर्नओवर और रजिस्ट्रेशन की स्थिति की जांच करनी चाहिए। सही इनवॉइस और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह है कि खरीदारी करते समय बिल जरूर देखें और सुनिश्चित करें कि नई जीएसटी दरें लागू की गई हैं। कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और बीमा पॉलिसी जैसी चीजें खरीदने या रिन्यू कराने के लिए यह समय अनुकूल माना जा रहा है।
निष्कर्ष
जीएसटी 2.0 ने टैक्स व्यवस्था को सरल और व्यवहारिक बना दिया है। रोजमर्रा की चीजों के सस्ते होने से आम आदमी को राहत मिली है, वहीं व्यापार के लिए भी नियम स्पष्ट हुए हैं। यह सुधार सिर्फ आज का नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव रखने वाला कदम है।









