सोना-चांदी की ऐतिहासिक गिरावट, Silver 40% और सोना 25% क्रैश , ये फैक्टर जिम्मेदार, जानें पूरी रिपोर्ट Gold Silver Price Crash 2026

By Vishwaja

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Gold Silver Price Crash 2026

Gold Silver Price Crash 2026: सोना-चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। जो धातुएं सदियों से भरोसे का प्रतीक रही हैं, वही आज बाजार में बिखरी पड़ी हैं। चांदी ऑल टाइम हाई से करीब 40% टूट चुकी है और सोना भी 25% तक फिसल गया है। यह कोई मामूली करेक्शन नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत है—बाजार की नब्ज बदल रही है, और निवेशकों को इसे समझना होगा।

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सोना-चांदी की तेजी से गिरावट: क्या सच में टूटा भरोसा?

बीते कुछ महीनों में सोना और चांदी जिस रफ्तार से ऊपर चढ़े थे, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज होने लायक था। वैश्विक अनिश्चितता, युद्ध जैसे हालात, महंगाई का डर और सट्टा निवेश—इन सबने मिलकर कीमतों को आसमान तक पहुंचा दिया। लेकिन बाजार का स्वभाव पुराना है, वह कभी एक दिशा में हमेशा नहीं चलता। जैसे ही हालात बदले, मुनाफावसूली शुरू हुई और वही तेजी अब भारी गिरावट में बदल गई। यह याद रखने की बात है कि बाजार हमेशा संतुलन खोजता है, और यही संतुलन इस समय दर्दनाक रूप में सामने आया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी दबाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो सोना लगभग 4,500 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 7–8% नीचे है। चांदी की हालत और ज्यादा खराब है, जो 14% से ज्यादा गिरकर 72 डॉलर के आसपास पहुंच गई है। यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि लंबे समय से जमा हुए तनाव का नतीजा है। जब तेजी बहुत तेज होती है, तो गिरावट भी उतनी ही बेरहम होती है—यह बाजार का पुराना नियम है।

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भारतीय बाजार भी अछूता नहीं

भारत में भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स दोनों में तेज बिकवाली देखने को मिली। खासकर चांदी में आई दो अंकों की गिरावट ने छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई है। भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि परंपरा है—शादी, त्योहार, और बचत का आधार। ऐसे में कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट भावनात्मक स्तर पर भी असर डालती है।

ऑल टाइम हाई से बड़ी टूट: आंकड़े क्या कहते हैं

अगर आंकड़ों की सच्चाई देखें, तो सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 1,100 डॉलर नीचे आ चुका है। चांदी तो और भी बुरी हालत में है—रिकॉर्ड स्तर से लगभग 50 डॉलर नीचे। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह गिरावट ऐतिहासिक है। यह वही दौर है जब निवेशक पूछने लगे हैं—क्या हमने ऊंचे स्तर पर खरीदकर गलती कर दी?

डॉलर की मजबूती: गिरावट की बड़ी वजह

सोना और चांदी की कीमतें हमेशा अमेरिकी डॉलर से उल्टा रिश्ता रखती हैं। जैसे ही डॉलर मजबूत होता है, कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है। हाल के दिनों में डॉलर को समर्थन मिला है, खासकर अमेरिकी नीति संकेतों के कारण। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय निवेशक सोना-चांदी से पैसा निकालकर डॉलर आधारित एसेट्स की ओर बढ़ते हैं, और यही बिकवाली को तेज कर देता है।

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ट्रंप और फेड: बयानबाजी का बाजार पर असर

अमेरिकी राजनीति और मौद्रिक नीति का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ता है। Donald Trump के कमजोर डॉलर के समर्थन में दिए गए बयानों ने पहले बाजार में भ्रम पैदा किया। वहीं, Federal Reserve की भविष्य की नीति को लेकर अनिश्चितता बनी रही। निवेशक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि आगे ब्याज दरों की दिशा क्या होगी। यही अनिश्चितता सोना-चांदी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली धातुओं में भी उतार-चढ़ाव बढ़ा रही है।

COMEX मार्जिन बढ़ोतरी: बिकवाली को मिला ईंधन

बाजार की गिरावट को और तेज करने वाला एक अहम कारण CME Group का फैसला रहा। COMEX पर सोना और चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन बढ़ा दिया गया। जब मार्जिन बढ़ता है, तो ट्रेडर्स को ज्यादा पूंजी लगानी पड़ती है। नतीजा—वे अपनी पोजिशन कम करने लगते हैं। यही पोजिशन अनवाइंडिंग बाजार में अचानक बिकवाली का तूफान ले आती है।

लीवरेज का खेल और निवेशकों का नुकसान

ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करने वालों के लिए यह गिरावट किसी झटके से कम नहीं रही। मार्जिन कॉल पूरी करने के लिए उन्हें न सिर्फ सोना-चांदी, बल्कि दूसरे एसेट्स भी बेचने पड़े। यह वही पुरानी सीख है जो बाजार बार-बार सिखाता है—उधार की ताकत से खड़ा साम्राज्य एक झटके में ढह सकता है।

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क्या लंबी अवधि का भरोसा अब भी कायम है?

इतिहास गवाह है कि सोना और चांदी लंबे समय में खुद को साबित करते आए हैं। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, महंगाई का डर और वैश्विक अस्थिरता—ये सभी फैक्टर अब भी मौजूद हैं। कम ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज देने वाली धातुएं ज्यादा आकर्षक लगती हैं। इसलिए यह गिरावट भले ही डरावनी लगे, लेकिन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह मौका भी हो सकता है।

अब खरीदें या रुकें? कड़वी लेकिन सच्ची बात

सच यही है कि बाजार में कोई भी सटीक समय नहीं पकड़ सकता। जो निवेशक लंबी सोच रखते हैं, उनके लिए चरणबद्ध खरीद समझदारी हो सकती है। लेकिन आंख मूंदकर कूदना भी खतरे से खाली नहीं। परंपरा हमें सिखाती है कि धैर्य सबसे बड़ा हथियार है। बाजार आज गिरा है, कल उठेगा—लेकिन केवल वही टिकेगा जिसने जल्दबाजी नहीं की।

निष्कर्ष 

सोना और चांदी की यह ऐतिहासिक गिरावट बाजार की असली प्रकृति को उजागर करती है। यहां कुछ भी स्थायी नहीं—न तेजी, न मंदी। जो निवेशक इस सच को समझते हैं, वही लंबी दौड़ के विजेता बनते हैं। आज का समय डर का नहीं, समझदारी का है। इतिहास, परंपरा और भविष्य—तीनों को साथ रखकर लिया गया फैसला ही सही निवेश कहलाता है।

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