Cement Sariya Latest Rate:
जीएसटी कटौती का लाभ क्यों नहीं मिला आम उपभोक्ताओं को?
घर निर्माण से जुड़े लोगों के लिए सीमेंट और सरिया के दाम हमेशा चिंता का विषय रहते हैं। हाल के वर्षों में उम्मीद की जा रही थी कि जीएसटी दरों में बदलाव के बाद सीमेंट की कीमतों में राहत मिलेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जीएसटी में कटौती के बावजूद आम ग्राहकों को इसका सीधा फायदा अब तक नहीं मिल पाया है। उल्टा, बाजार में कीमतें स्थिर रहने के बाद एक बार फिर बढ़ोतरी की तैयारी दिखाई दे रही है।
जीएसटी में बदलाव और कीमतों पर असर
22 सितंबर को सरकार ने सीमेंट पर लगने वाली जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। नियमों के अनुसार, इस बदलाव के बाद सीमेंट की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की कमी आनी चाहिए थी। इसका मतलब यह था कि एक बोरी सीमेंट पर ग्राहकों को 25 से 30 रुपये तक की राहत मिलनी चाहिए थी। लेकिन खुले बाजार में ऐसा होता दिखाई नहीं दिया।
सरकारी परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले नॉन-ट्रेड सीमेंट के दामों में जरूर लगभग 25 रुपये की कटौती की गई, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में यह दिखाया जा सके कि कीमतें कम हुई हैं। वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए बिकने वाले ट्रेड सीमेंट में कंपनियों ने अलग तरीका अपनाया और वास्तविक लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचने दिया।
बिलिंग और डिस्काउंट का खेल
सीमेंट उद्योग में कीमतें तय करने का तरीका काफी हद तक बिलिंग और डिस्काउंट पर निर्भर करता है। पहले ज्यादातर कंपनियां सीमेंट की बिलिंग 300 से 320 रुपये प्रति बोरी तक करती थीं। इसके बाद डीलरों को अलग-अलग स्तर पर डिस्काउंट दिया जाता था, जिससे उन्हें वही सीमेंट 250 से 270 रुपये में मिल जाता था।
जीएसटी में कटौती के बाद कंपनियों ने अपनी बिलिंग कीमतें कागजों पर कम कर दीं। उदाहरण के तौर पर, 320 रुपये की जगह 290 रुपये की बिलिंग दिखाने लगीं। लेकिन साथ ही डिस्काउंट की राशि घटा दी गई। नतीजा यह हुआ कि डीलरों को मिलने वाली वास्तविक कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं आया।
आज के सीमेंट के ताजा रेट
वर्तमान समय में बाजार की स्थिति देखें तो डीलरों को सीमेंट लगभग 270 रुपये प्रति बोरी के आसपास पड़ रहा है। थोक बाजार में यह 280 से 290 रुपये में बिक रहा है, जबकि खुदरा ग्राहकों को 300 से 310 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। यह वही स्तर है, जिस पर जीएसटी कटौती से पहले सीमेंट बिक रहा था।
अब कंपनियों की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही 15 से 20 रुपये प्रति बोरी तक की और बढ़ोतरी की जा सकती है। अगर ऐसा हुआ तो थोक में सीमेंट की कीमत 300 रुपये के पार पहुंच जाएगी और खुदरा बाजार में यह 330 रुपये तक बिक सकता है।
घर बनाने वालों पर असर
सीमेंट की कीमतों में अपेक्षित कमी न आने का सीधा असर घर बनाने वालों पर पड़ रहा है। पहले ही निर्माण सामग्री महंगी है और मजदूरी की लागत भी बढ़ चुकी है। ऐसे में अगर सीमेंट सस्ता होता, तो निर्माण लागत में थोड़ी राहत मिल सकती थी। लेकिन कीमतें जस की तस रहने से आम आदमी का बजट लगातार दबाव में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी कटौती का असली लाभ तभी मिल सकता है, जब कंपनियां बिलिंग और डिस्काउंट की पारदर्शी व्यवस्था अपनाएं। फिलहाल जो व्यवस्था चल रही है, उसमें उपभोक्ता को सिर्फ आंकड़ों में राहत दिखाई जाती है, वास्तविक कीमत में नहीं।
सरिया के आज के रेट और बाजार की स्थिति
सीमेंट के साथ-साथ सरिया यानी स्टील की कीमतें भी निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा तय करती हैं। वर्तमान समय में सरिया के रेट भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं। अलग-अलग ब्रांड और क्वालिटी के हिसाब से सरिया 55,000 से 65,000 रुपये प्रति टन के आसपास बाजार में उपलब्ध है।
पिछले कुछ महीनों में सरिया के दामों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कच्चे माल की कीमतें, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और मांग के आधार पर इसके रेट तय हो रहे हैं। फिलहाल सरिया में कोई बड़ी राहत नहीं दिख रही, लेकिन अचानक तेज उछाल भी नहीं आया है।
सीमेंट और सरिया के दाम क्यों बढ़ते रहते हैं?
सीमेंट और सरिया दोनों की कीमतें कई कारणों से प्रभावित होती हैं। कच्चे माल की लागत, ईंधन की कीमतें, ट्रांसपोर्ट खर्च, मांग और आपूर्ति का संतुलन, और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति—ये सभी फैक्टर कीमतों को ऊपर-नीचे करते हैं।
सीमेंट के मामले में बिलिंग और डिस्काउंट की रणनीति भी अहम भूमिका निभाती है। कंपनियां बिल पर ज्यादा कीमत दिखाकर बाद में डिस्काउंट देती हैं, जिससे वास्तविक दाम छिपे रहते हैं। जीएसटी में बदलाव के बाद भी इसी सिस्टम का इस्तेमाल कर कीमतों को लगभग पुराने स्तर पर बनाए रखा गया।
डीलरों और ग्राहकों की मजबूरी
डीलर भी इस पूरे खेल में फंसे हुए हैं। पहले उन्हें ज्यादा डिस्काउंट मिलता था, जिससे वे मुनाफा कमाकर भी ग्राहकों को थोड़ा सस्ता सीमेंट दे पाते थे। अब डिस्काउंट घटने से उनकी मार्जिन कम हो गई है। ग्राहक बनाए रखने के लिए वे मजबूरी में पुराने दामों पर ही सीमेंट बेच रहे हैं।
इसका नतीजा यह है कि न तो डीलर को ज्यादा फायदा हो रहा है और न ही ग्राहक को जीएसटी कटौती का वास्तविक लाभ मिल पा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर कंपनियां वाकई कीमतें बढ़ाती हैं, तो आने वाले समय में निर्माण लागत और बढ़ सकती है। घर बनाने वालों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जो लोग निर्माण की योजना बना रहे हैं, वे बाजार की स्थिति पर नजर रखें और संभव हो तो थोक में सामग्री खरीदकर कुछ हद तक लागत नियंत्रित करने की कोशिश करें।
कुल मिलाकर, सीमेंट और सरिया के मौजूदा रेट यह संकेत दे रहे हैं कि निकट भविष्य में बड़ी राहत की उम्मीद कम है। जीएसटी कटौती के बावजूद कीमतों में स्थायी कमी तभी संभव है, जब बाजार में पारदर्शिता आए और कंपनियां वास्तविक रूप से उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएं।









