Cigarette Price Today News: देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों के लिए आने वाला समय महंगा साबित हो सकता है। केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर लगने वाले टैक्स ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सिगरेट की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। सोशल मीडिया पर 18 रुपये की सिगरेट के 72 रुपये तक पहुंचने के दावे जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक बढ़ोतरी 15 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
सरकार का यह कदम केवल राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करने का भी स्पष्ट उद्देश्य है। नई टैक्स नीति के तहत अब सिगरेट पर कर की गणना पहले से अलग तरीके से की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों पर असर पड़ेगा।
सरकार ने क्यों बदला सिगरेट पर टैक्स का ढांचा
सरकार का मानना है कि भारत में सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाला टैक्स अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर विश्व स्वास्थ्य संगठनों की सिफारिशों की तुलना में कम है। तंबाकू से जुड़ी बीमारियों पर होने वाला स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में सरकार ने इन उत्पादों को महंगा बनाकर खपत कम करने की दिशा में कदम उठाया है।
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अब तक सिगरेट पर 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ कंपनसेशन सेस लगाया जाता था। लेकिन 1 फरवरी 2026 से यह कंपनसेशन सेस पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा और उसकी जगह नई एक्साइज ड्यूटी के साथ उच्च जीएसटी दर लागू की जाएगी। इससे टैक्स सिस्टम सरल होने के साथ-साथ निगरानी भी सख्त होगी।
1 फरवरी 2026 से लागू होगी नई टैक्स व्यवस्था
नई नीति के अनुसार अब सभी सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा। इसके साथ ही एक नई स्पेसिफिक एक्साइज ड्यूटी भी लागू होगी, जो सिगरेट की लंबाई और प्रकार के आधार पर तय की जाएगी। यह बदलाव सेंट्रल एक्साइज (संशोधन) एक्ट, 2025 के तहत किया गया है।
इस नई प्रणाली का एक अहम पहलू यह है कि टैक्स की गणना अब पैकेट पर छपी अधिकतम खुदरा कीमत यानी एमआरपी के आधार पर होगी। इससे टैक्स चोरी की संभावनाएं काफी हद तक कम हो जाएंगी और सरकार को वास्तविक बिक्री के अनुसार राजस्व मिलेगा।
नई सिगरेट टैक्स दरों का संक्षिप्त विवरण
नई टैक्स व्यवस्था के तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रभावी तिथि 1 फरवरी 2026 तय की गई है। सभी सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा, जबकि पहले यह 28 प्रतिशत था। एक्साइज ड्यूटी अब ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक तक हो सकती है। बीड़ी पर जीएसटी दर को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 28 प्रतिशत थी। कुल मिलाकर सिगरेट की कीमतों में 15 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सिगरेट की लंबाई के आधार पर लगेगा नया एक्साइज टैक्स
नई व्यवस्था में सिगरेट की लंबाई को टैक्स निर्धारण का आधार बनाया गया है। बिना फिल्टर वाली और 65 मिलीमीटर से कम लंबाई की सिगरेट पर लगभग ₹2,050 प्रति 1,000 स्टिक की एक्साइज ड्यूटी लगेगी। फिल्टर वाली सिगरेट, जिनकी लंबाई 70 से 75 मिलीमीटर के बीच होती है, उन पर करीब ₹5,400 प्रति 1,000 स्टिक का कर लगाया जाएगा।
वहीं प्रीमियम और अधिक लंबी सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी का बोझ और ज्यादा होगा, जो ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा और कंपनियों को अपनी प्राइसिंग रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा।
पान मसाला और चबाने वाले तंबाकू पर भी सख्ती
सरकार की नई टैक्स नीति केवल सिगरेट तक सीमित नहीं है। पान मसाला, गुटखा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पादों पर भी टैक्स का दायरा बढ़ाया गया है। इन उत्पादों के लिए अब कैपेसिटी बेस्ड लेवी सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें टैक्स उत्पादन की मात्रा पर नहीं बल्कि मशीनों की क्षमता और गति पर आधारित होगा।
पान मसाला पर 40 प्रतिशत जीएसटी के साथ एक विशेष हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाया जाएगा। गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कुल टैक्स का बोझ 88 प्रतिशत से 91 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। कंपनियों को मशीनों की संख्या और उत्पादन क्षमता के आधार पर हर महीने भारी भरकम ड्यूटी चुकानी होगी।
टैक्स चोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी
नई नीति के तहत टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। फैक्ट्रियों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है और सभी मशीनों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस सख्ती से उन क्षेत्रों में भी टैक्स वसूली संभव हो पाएगी, जहां पहले अनियमितताओं की शिकायतें मिलती थीं।
आम जनता और कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले के बाद सिगरेट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। निवेशकों को आशंका है कि कीमतें बढ़ने से सिगरेट की बिक्री में गिरावट आ सकती है। उपभोक्ताओं के लिए सिगरेट खरीदना महंगा होगा, जिससे कुछ लोग बीड़ी या अवैध सिगरेट की ओर रुख कर सकते हैं।
वहीं स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो यह फैसला सकारात्मक माना जा रहा है। सिगरेट और तंबाकू महंगे होने से इनके सेवन में कमी आ सकती है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं घटने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाली नई टैक्स व्यवस्था भारतीय तंबाकू बाजार की तस्वीर बदल सकती है। हालांकि सोशल मीडिया पर कीमतों में चार गुना बढ़ोतरी के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक असर कंपनियों की रणनीति और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नुकसानदेह उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर न केवल राजस्व बढ़ाया जाएगा, बल्कि लोगों को स्वस्थ विकल्पों की ओर भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न सरकारी सूचनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी अलग-अलग ब्रांड और पैकेट के अनुसार अलग हो सकती है। धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और यह जानकारी केवल जनहित में साझा की गई है।









