Weather Update 2026: उत्तर भारत की फिज़ा एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। सर्दियों के पुराने उसूलों की तरह, फरवरी का पहला हफ्ता अपने साथ नमी, ठंडक और आसमान से गिरती राहत भी लाता है और चुनौती भी। पश्चिम से उठती हलचल—जिसे मौसम की भाषा में पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है—देश के बड़े हिस्से पर असर डालने जा रही है। 3, 4 और 5 फरवरी को बारिश, पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कोहरे का घना जाल देखने को मिलेगा। यह बदलाव केवल तापमान नहीं बदलेगा, बल्कि खेती, यातायात और रोज़मर्रा की रफ्तार पर भी असर डालेगा।
पश्चिमी विक्षोभ की वापसी और मौसम का मिज़ाज
जनवरी के आख़िरी दिनों में सक्रिय हुए विक्षोभ ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि सर्दी अभी विदा नहीं हुई है। अब 3 और 5 फरवरी को दो नए सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिनका असर उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर मध्य भारत तक महसूस किया जाएगा। हिमालयी इलाकों में बर्फ की चादर और मैदानों में हल्की से मध्यम बारिश—यही वह पुराना सिलसिला है, जो हर साल इस वक्त लौटता है। मौसम विज्ञान की परंपरागत समझ कहती है कि यह दौर रबी फसलों के लिए जीवनदायी हो सकता है, बशर्ते बारिश संतुलित रहे।
किन राज्यों में पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम स्तर की बर्फबारी की संभावना है। पहाड़ों पर बर्फ गिरने से नदियों और जलस्रोतों को ताकत मिलेगी, लेकिन यातायात बाधित हो सकता है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी-दक्षिणी राजस्थान में बारिश के साथ तेज़ हवाएं चल सकती हैं। कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दक्षिणी राजस्थान में।
घना कोहरा: रफ्तार पर ब्रेक
3 से 5 फरवरी तक सुबह और रात के वक्त घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दृश्यता बेहद कम हो सकती है। यह वही कोहरा है जो सर्दियों में रेल और सड़क यातायात की परीक्षा लेता है। अनुभवी लोग जानते हैं—इस मौसम में जल्दबाज़ी नहीं, सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। पुराने समय की कहावत आज भी सही बैठती है: कोहरे में धीमी चाल ही सुरक्षित चाल है।
गरज-चमक और तेज़ हवाओं का असर
उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। गरज-चमक के साथ होने वाली बारिश तापमान में हल्की गिरावट लाएगी, जिससे शीतलहर की तीव्रता कुछ कम हो सकती है। यह राहत अस्थायी होगी, लेकिन ठंड से जूझ रहे लोगों के लिए सांस लेने जैसा पल दे सकती है।
पूरे फरवरी का पूर्वानुमान: कमजोर ठंड, कम बारिश
India Meteorological Department के अनुसार फरवरी 2026 में देशभर में औसत से कम बारिश होने की संभावना है—लगभग 81 प्रतिशत के आसपास। तापमान सामान्य से ऊपर रहने के संकेत हैं, यानी ठंड के दिन कम होंगे और गर्माहट धीरे-धीरे बढ़ेगी। उत्तर-पश्चिमी गेहूं उत्पादक क्षेत्र—पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश—में लंबी अवधि के औसत से करीब 78 प्रतिशत कम वर्षा का अनुमान है। यह आंकड़ा किसानों के लिए चेतावनी की तरह है।
खेती पर असर और किसानों के लिए सलाह
रबी फसलों के लिए यह समय निर्णायक होता है। कम बारिश का मतलब है कि सिंचाई का संतुलन साधना होगा। मौसम विशेषज्ञों की सीधी सलाह है—मौसम पर नज़र रखें, जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें और ओलावृष्टि की आशंका वाले इलाकों में फसलों की सुरक्षा के इंतज़ाम पहले से कर लें। परंपरा और अनुभव यही कहते हैं कि समय रहते उठाया गया कदम नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।
शहरी जीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव
कोहरे और नमी का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहता। सांस से जुड़ी दिक्कतें, आंखों में जलन और ठंड से जुड़ी बीमारियां इस दौर में बढ़ सकती हैं। बुज़ुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गर्म कपड़े, संतुलित आहार और सुबह-शाम की ठंड से बचाव—ये पुराने लेकिन कारगर नुस्खे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी चेतावनी
रेल और हवाई यात्रियों को संभावित देरी के लिए तैयार रहना चाहिए। कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार कम हो सकती है और उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव संभव है। सफर पर निकलने से पहले मौसम अपडेट लेना समझदारी होगी। मौसम की चाल को समझना ही सुरक्षित यात्रा की पहली शर्त है।
परंपरा, प्रकृति और भविष्य की सोच
मौसम का यह बदलाव हमें याद दिलाता है कि प्रकृति अपने तयशुदा रास्ते पर चलती है। पश्चिमी विक्षोभ सदियों से इसी तरह आते-जाते रहे हैं—कभी राहत, कभी चुनौती बनकर। फर्क बस इतना है कि आज हमें विज्ञान की मदद से पहले से चेतावनी मिल जाती है। आगे की सोच यही होनी चाहिए कि इस जानकारी का सही इस्तेमाल किया जाए—कृषि से लेकर शहरों की योजना तक।
निष्कर्ष
3, 4 और 5 फरवरी का मौसम उत्तर भारत के लिए निर्णायक रहने वाला है। बारिश और बर्फबारी से जहां कुछ राहत मिलेगी, वहीं कोहरा और ओलावृष्टि नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। समझदारी, सतर्कता और परंपरागत अनुभव—इन तीनों का मेल ही इस बदलते मौसम में सबसे बड़ा सहारा है। मौसम बदलेगा, रंग बदलेगा, लेकिन तैयारी के साथ चलें तो नुकसान कम और लाभ ज्यादा होगा।









