2 से 4 फरवरी तक देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का खतरा, मौसम विभाग ने जारी की सख्त चेतावनी IMD Rain Alert

By Vishwaja

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IMD Rain Alert

IMD Rain Alert: फरवरी की दहलीज़ पर कदम रखते ही मौसम ने पुराने मिज़ाज की याद दिला दी है। जो लोग यह मान बैठे थे कि सर्दी अब इतिहास बन चुकी है, उन्हें फिर से ऊनी कपड़ों की अलमारी खोलनी पड़ेगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी Indian Meteorological Department ने 2 से 4 फरवरी 2026 तक देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं को लेकर येलो और रेड अलर्ट जारी किया है। वजह वही पुराना खिलाड़ी—सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ—जो हर साल इस मौसम में उत्तर भारत की फिज़ा को पलट देता है। यह कोई नई कहानी नहीं, लेकिन हर बार असर नया और तीखा होता है। इस बार भी पहाड़ों से लेकर मैदानों तक मौसम की चाल बदली हुई है, और ठंड एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।

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पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक: मौसम ने बदला सुर

पश्चिमी विक्षोभ का नाम सुनते ही अनुभवी लोग समझ जाते हैं कि सर्द हवाओं, बादलों और बारिश का सिलसिला शुरू होने वाला है। 2 फरवरी से सक्रिय हुआ यह सिस्टम उत्तर भारत के ऊपर असर दिखा रहा है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी तेज़ होगी, और वही बर्फीली हवाएं मैदानों में उतरकर तापमान को नीचे खींच लेंगी। मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के मुताबिक अगले तीन दिन मौसम का मिज़ाज चंचल रहेगा—कभी बादल, कभी बारिश, और बीच-बीच में तेज़ हवा। यह वही दौर है जब सर्दी जाने से पहले आख़िरी बार अपनी ताक़त दिखाती है।

पहाड़ों पर बर्फ, मैदानों में बारिश का दौर

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊँचे इलाकों में भारी बर्फबारी की प्रबल संभावना है। यह बर्फ केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहती, इसका असर मैदानों में साफ दिखता है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली-एनसीआर, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 फरवरी के बीच गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। कई जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं। नतीजा—दिन और रात के तापमान में साफ गिरावट, और लोगों की दिनचर्या पर ठंड का दबाव।

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ओलावृष्टि का खतरा: किसानों के लिए चेतावनी

मौसम का यह बदला हुआ रंग सबसे ज़्यादा चिंता किसानों के माथे पर लकीरें खींच रहा है। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में बारिश के साथ ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है। गेहूं और सरसों की फसल इस समय या तो फूल पर है या पकने की कगार पर। ऐसे में ओले गिरे या तेज़ आंधी चली तो फसल बिछने का ख़तरा बढ़ जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि किसान अगले कुछ दिन सतर्क रहें, खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था रखें और मौसम अपडेट पर नज़र बनाए रखें। यह वही समय है जब एक रात का मौसम पूरे सीज़न की मेहनत तय कर देता है।

दिल्ली-एनसीआर में ठिठुरन की वापसी

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में आसमान बादलों से ढका रहेगा। रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश, तेज़ हवाएं और तापमान में गिरावट—यह सब मिलकर ठंड को फिर से महसूस कराएंगे। जनवरी के आख़िरी दिनों में निकली धूप ने लोगों को जो राहत दी थी, वह फिलहाल जाती दिख रही है। सुबह और रात की ठिठुरन बढ़ेगी, और बुज़ुर्गों व बच्चों को खास सावधानी बरतने की ज़रूरत होगी। यह मौसम बीमारियों के लिहाज़ से भी नाज़ुक होता है, इसलिए लापरवाही भारी पड़ सकती है।

सर्दी का ‘यू-टर्न’: क्यों चौंकाता है फरवरी का मौसम

पुराने लोग कहते आए हैं—फरवरी भरोसेमंद नहीं होती। दिन में धूप और शाम को ठंड, यही इसकी पहचान है। इस साल भी वही कहानी दोहराई जा रही है। पहाड़ों से उतरती बर्फीली हवाएं रात और सुबह की ठंड को बढ़ा रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि बारिश थमने के बाद 5 फरवरी के आसपास घना कोहरा भी लौट सकता है। यानी साफ आसमान के बावजूद सर्दी का असर बना रहेगा। यह मौसम अपने साथ धैर्य की परीक्षा लाता है।

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5 फरवरी के बाद क्या मिलेगी राहत?

मौसम विभाग के अनुसार 4 फरवरी की शाम से पश्चिमी विक्षोभ का असर धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाएगा। इसके बाद आसमान साफ होगा, लेकिन राहत पूरी नहीं होगी। बारिश रुकते ही रात के न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। अगले एक हफ्ते तक सुबह और शाम की सर्दी तेज़ रहने की संभावना है। 5 फरवरी से दिन में धूप निकल सकती है, जो कुछ राहत देगी, मगर हवाओं में ठंडक बनी रहेगी। मतलब साफ है—सर्दी पूरी तरह विदा होने में अभी वक्त है।

आम जनता और प्रशासन के लिए सीधी सलाह

यह समय लापरवाही का नहीं है। मौसम अलर्ट को हल्के में न लें। यात्रा करने वाले लोग मौसम की जानकारी लेकर ही निकलें। पहाड़ी इलाकों में जाने से पहले हालात ज़रूर जांच लें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के उपाय करें। आम लोग गर्म कपड़े पहनें, बच्चों और बुज़ुर्गों का खास ध्यान रखें। मौसम हर साल आता-जाता है, लेकिन जो सतर्क रहता है वही नुकसान से बचता है। परंपरा और अनुभव यही सिखाते हैं—प्रकृति के संकेतों को समझो, उसके साथ चलो, तभी आगे का रास्ता आसान होता है।

निष्कर्ष 

फरवरी की शुरुआत ने साफ कर दिया है कि सर्दी अभी अपने आख़िरी पन्ने पलट रही है। बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि का यह दौर कुछ दिन की परेशानी ज़रूर लाएगा, लेकिन इसके बाद मौसम धीरे-धीरे स्थिर होगा। तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। मौसम बदलेगा, धूप लौटेगी, लेकिन फिलहाल ऊनी कपड़े पास रखें—क्योंकि सर्दी ने अभी विदाई नहीं ली है।

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