UIDAI New Aadhaar Rule: आज के समय में लगभग हर सरकारी काम डिजिटल हो चुका है और जन्म प्रमाण पत्र भी इससे अछूता नहीं है। पहले जहां लोगों को अस्पताल, नगर निगम या रजिस्ट्रार कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, अब वही काम मोबाइल और इंटरनेट से आसानी से हो रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की नई पहल ने इस प्रक्रिया को सरल तो बनाया है, लेकिन साथ ही कुछ नए नियम भी लागू किए गए हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। खासकर बच्चों के आधार कार्ड और जन्मतिथि के प्रमाण को लेकर UIDAI और जन्म–मृत्यु पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव हुए हैं।
जन्म–मृत्यु पंजीकरण के लिए नया ऑनलाइन सिस्टम
भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2023 में एक नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया। इसके बाद कई राज्यों, जिनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है, में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया। अब बच्चे के जन्म के तुरंत बाद अस्पताल या ANM (आशा/नर्स) द्वारा ऑनलाइन एंट्री कर दी जाती है। परिवार को केवल पोर्टल पर लॉगिन कर प्रमाण पत्र डाउनलोड करना होता है।
इस डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रमाण पत्र पर QR कोड होता है, जिसे स्कैन कर कहीं भी सत्यापित किया जा सकता है। इससे फर्जी दस्तावेजों की संभावना लगभग खत्म हो गई है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है।
जन्मतिथि प्रमाण के नियमों में बड़ा बदलाव
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में 2023 के दौरान संशोधन किए गए, जिनका सीधा असर बच्चों के दस्तावेजों पर पड़ा है। नए नियमों के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों के लिए केवल ऑनलाइन जारी जन्म प्रमाण पत्र को ही जन्मतिथि का मान्य प्रमाण माना जाएगा।
अब स्कूल में दाखिला, आधार कार्ड बनवाना, पासपोर्ट आवेदन या किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए यही प्रमाण पत्र जरूरी होगा। पहले जिन बच्चों का जन्म अक्टूबर 2023 से पहले हुआ है, उनके लिए कुछ हद तक राहत है, क्योंकि उनके मामले में 10वीं की मार्कशीट, स्कूल प्रमाण पत्र या एफिडेविट जैसे पुराने दस्तावेज अभी भी मान्य रहेंगे।
QR कोड वाले जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता
नए सिस्टम में QR कोड एक बेहद अहम हिस्सा बन गया है। कई जिलों में आधार नामांकन या अपडेट के समय केवल QR कोड वाला जन्म प्रमाण पत्र ही स्वीकार किया जा रहा है। जिन प्रमाण पत्रों पर QR कोड नहीं है, उन्हें कई जगहों पर अस्वीकार कर दिया जा रहा है।
शुरुआत में पोर्टल लॉन्च होने के बाद कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं, लेकिन अब स्थिति काफी हद तक सुधर चुकी है। रजिस्ट्रार कार्यालयों और संबंधित कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, ताकि हर प्रमाण पत्र सही तरीके से और QR कोड के साथ जारी हो सके।
पुराने बच्चों के लिए क्या हैं विकल्प?
अगर आपके बच्चे का जन्म अक्टूबर 2023 से पहले हुआ है और आपके पास पुराना जन्म प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए यह सलाह दी जा रही है कि पुराने रिकॉर्ड को भी नए ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करा लिया जाए।
ऑनलाइन अपडेट के बाद आपको नया डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र मिल जाएगा, जिसमें QR कोड होगा। यह प्रमाण पत्र आधार अपडेट, स्कूल एडमिशन और सरकारी योजनाओं में बिना किसी दिक्कत के स्वीकार किया जाएगा। कई अभिभावकों ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली है और उन्हें अब दस्तावेजों के कारण कहीं अटकना नहीं पड़ रहा।
आधार कार्ड के नियमों में मिली राहत
UIDAI के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अब बच्चों के आधार कार्ड के लिए जन्म प्रमाण पत्र को लेकर कुछ हद तक राहत दी गई है, खासकर पुराने मामलों में। जहां पहले हर स्थिति में जन्म प्रमाण पत्र मांगा जाता था, वहीं अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जन्मतिथि के लिए वही दस्तावेज मान्य होंगे, जो संबंधित समय के नियमों के अनुसार स्वीकार्य हैं।
हालांकि, नए नियमों के तहत पैदा हुए बच्चों के लिए डिजिटल और QR कोड वाला जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा। इसलिए बेहतर यही है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका पंजीकरण कराकर प्रमाण पत्र डाउनलोड कर लिया जाए।
ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं: स्टेप बाय स्टेप
ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया काफी आसान है। इसके लिए आपको केंद्र सरकार के CRS पोर्टल या अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा।
सबसे पहले मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद बच्चे के जन्म से जुड़ी जानकारी भरें, जैसे जन्म की तारीख, स्थान और अस्पताल का विवरण। यदि अस्पताल आईडी उपलब्ध है, तो प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। आवश्यक दस्तावेज, जैसे माता-पिता का आधार कार्ड और पहचान पत्र अपलोड करें।
आवेदन सबमिट करने के बाद 7 से 15 दिनों के भीतर आपको SMS के जरिए सूचना मिल जाती है। इसके बाद आप पोर्टल से डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। शुल्क बहुत कम या कई जगहों पर बिल्कुल नहीं लिया जाता। जिन लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत होती है, वे नजदीकी सेवा केंद्र या रजिस्ट्रार कार्यालय से भी मदद ले सकते हैं।
डिजिटल बदलाव से क्या होगा फायदा?
यह पूरा बदलाव डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है। इससे न सिर्फ समय और पैसा बचता है, बल्कि दस्तावेजों की सुरक्षा और विश्वसनीयता भी बढ़ती है। QR कोड वाले प्रमाण पत्र से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सरकारी सेवाएं तेजी से मिलेंगी।
अगर आपने अभी तक अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है या पुराने प्रमाण पत्र को अपडेट नहीं कराया है, तो देर न करें। समय रहते यह काम कर लेने से भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है। डिजिटल सिस्टम को अपनाना अब मजबूरी नहीं, बल्कि सुविधा बन चुका है।









