Cyclone Motha Alert: को लेकर देशभर में मौसम को लेकर चिंता बढ़ गई है। गणतंत्र दिवस के ठीक बाद मौसम ने अचानक करवट ले ली है और उत्तर से लेकर पूर्वी भारत तक इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एक अत्यंत शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है, वहीं दूसरी ओर चक्रवाती तूफान ‘मोथा’ के प्रभाव से कई राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है।
इस मौसमी बदलाव का असर पहाड़ी इलाकों से शुरू होकर मैदानी राज्यों तक फैल रहा है। बादलों की घनी आवाजाही, तापमान में गिरावट और अचानक बढ़ी नमी ने पूरे उत्तर भारत के मौसम को अस्थिर बना दिया है। आने वाले कुछ दिन आम लोगों और किसानों दोनों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
Cyclone Motha Alert: क्यों बदला मौसम का मिजाज
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय दो बड़े मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं। एक ओर पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है, वहीं दूसरी ओर चक्रवाती तूफान ‘मोथा’ का असर वातावरण में नमी बढ़ा रहा है। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से बारिश और बर्फबारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में बादल लगातार सक्रिय हैं। यही कारण है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना सामान्य से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। Cyclone Motha Alert के तहत कई राज्यों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी का दौर
हिमालयी क्षेत्रों में मौसम सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फ गिरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की आशंका है।
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी हिमपात की चेतावनी जारी की गई है। कुल्लू, मनाली, लाहौल-स्पीति और चंबा जैसे इलाकों में बर्फबारी तेज हो सकती है। इससे सड़क यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ तापमान में भी तेज गिरावट दर्ज की जा सकती है।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भी बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने के संकेत हैं। उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे इलाकों में बर्फ गिरने से ठंड और बढ़ेगी। यात्रियों और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि का खतरा
Cyclone Motha Alert का असर अब मैदानी राज्यों में भी साफ नजर आने लगा है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में ओले गिरने की भी आशंका है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिलों में मौसम सबसे ज्यादा सक्रिय रहने वाला है। जयपुर, अलवर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। बादलों की वजह से दिन के तापमान में गिरावट आएगी और ठंड बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश और बिहार में कैसा रहेगा मौसम
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज मौसम बिगड़ सकता है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा और झांसी जैसे जिलों में बारिश की प्रबल संभावना जताई गई है। गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने से ठंड का असर और तेज हो सकता है।
यह मौसमी सिस्टम आगे बढ़ते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश को भी प्रभावित करेगा। वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे जिलों में अगले चरण में बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं बिहार के चंपारण, सिवान और पटना जैसे इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है, जिससे लंबे समय से बनी सूखे जैसी स्थिति में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
तापमान में गिरावट और पाले का अलर्ट
Cyclone Motha Alert के साथ-साथ ठंड को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही यह सिस्टम आगे बढ़ेगा, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं फिर से मैदानी इलाकों में प्रभावी हो जाएंगी।
इसके चलते न्यूनतम तापमान में दोबारा बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। 29 जनवरी से राजस्थान के कई जिलों में पाले की आशंका जताई गई है। पाला फसलों के लिए बेहद नुकसानदायक होता है, खासकर सरसों और सब्जियों की फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ उत्तरी हिस्सों में भी हल्की बूंदाबांदी के साथ ठंड बढ़ने के संकेत हैं। इन इलाकों में रात के तापमान में गिरावट देखी जा सकती है।
बदलते मौसम का असर जनजीवन पर
मौसम के इस बदले हुए मिजाज का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ेगा। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को मौसम की स्थिति देखकर ही निकलने की सलाह दी जा रही है। मैदानी क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है।
अचानक बढ़ी ठंड से बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ने की संभावना है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
किसानों के लिए Cyclone Motha Alert के तहत जरूरी सलाह
आने वाले 72 घंटे किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। Cyclone Motha Alert को ध्यान में रखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। पानी जमा होने से फसलें खराब हो सकती हैं।
29 जनवरी से संभावित पाले को देखते हुए सरसों, आलू और सब्जियों की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक प्रबंध करें। जहां संभव हो फसलों को ढकने या सिंचाई के माध्यम से पाले के असर को कम करने की कोशिश करें।
मौसम के ताजा अपडेट को ध्यान में रखते हुए ही सिंचाई, छिड़काव और अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं। गलत समय पर किया गया स्प्रे नुकसान बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
Cyclone Motha Alert के चलते देश के कई हिस्सों में मौसम पूरी तरह बदल चुका है। पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी और मैदानी राज्यों में बारिश व ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। तापमान में गिरावट और पाले की आशंका आने वाले दिनों में चुनौतियां बढ़ा सकती है।
ऐसे में आम लोगों और किसानों दोनों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
अस्वीकरण: यह मौसम संबंधी जानकारी वर्तमान उपग्रह आंकड़ों और विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित है। मौसम की परिस्थितियों में अचानक बदलाव संभव है, इसलिए ताजा अपडेट और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।















