Fertilizer Prices 2026: भारत में खेती केवल मेहनत का काम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने का भी खेल है। वर्ष 2026 में खाद के दामों को लेकर किसान पहले से ही सतर्क हैं। यूरिया, डीएपी, पोटाश और एनपीके जैसी प्रमुख उर्वरकों की कीमतें खेती की लागत और मुनाफे को सीधे प्रभावित करती हैं। ऐसे में केवल खाद के रेट जानना ही नहीं, बल्कि फसल के अंतिम चरण में सिंचाई और पोषण प्रबंधन को समझना भी उतना ही जरूरी है, खासकर गेहूं जैसी प्रमुख रबी फसल के लिए।
गेहूं की फसल में दाना भरने का महत्वपूर्ण समय
गेहूं की खेती में सबसे निर्णायक समय वह होता है जब फसल में बालियां निकल आती हैं और दानों में दूध भरने की अवस्था शुरू होती है, जिसे मिल्किंग स्टेज कहा जाता है। इस समय पौधे की पूरी ऊर्जा दानों के विकास पर केंद्रित होती है। यदि इस चरण में पानी या पोषक तत्वों की कमी हो जाए, तो दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते।
इस अवस्था में नमी की कमी से दाने सिकुड़े हुए, पतले और हल्के रह जाते हैं, जिससे न केवल पैदावार घटती है बल्कि बाजार में मिलने वाला भाव भी कम हो जाता है। इसलिए किसान भाइयों को यह समझना जरूरी है कि अंतिम सिंचाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी फसल का भविष्य तय करने वाला कदम है।
अंतिम सिंचाई के समय किन बातों का रखें ध्यान
अंतिम सिंचाई करते समय सबसे अहम कारक होता है मौसम, विशेषकर हवा की गति। यदि खेत में पानी देते समय तेज हवा चल रही हो, तो सिंचाई करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। पानी पड़ने के बाद मिट्टी नरम हो जाती है और ऐसे में तेज हवा के कारण गेहूं की फसल गिर सकती है, जिसे लॉजिंग कहा जाता है।
फसल गिरने से होने वाले नुकसान
जब फसल जमीन पर गिर जाती है, तो दानों तक सूर्य का प्रकाश और हवा ठीक से नहीं पहुंच पाती। इससे दानों का विकास रुक जाता है और उनमें नमी बढ़ने से रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, कटी हुई फसल को संभालना और मशीन या हाथ से कटाई करना बेहद कठिन हो जाता है।
इसी कारण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अंतिम सिंचाई हमेशा शांत मौसम में करें। शाम या रात का समय इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि उस समय हवा की गति सामान्यतः कम होती है और पानी का वाष्पीकरण भी कम होता है।
खाद प्रबंधन: अंतिम चरण में क्या करें और क्या नहीं
कई किसान अधिक पैदावार की उम्मीद में अंतिम सिंचाई के साथ यूरिया का प्रयोग कर देते हैं, लेकिन यह एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। इस चरण में यूरिया देने से पौधे की बढ़वार तो बढ़ती है, लेकिन तना कमजोर हो जाता है, जिससे फसल गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
यूरिया क्यों है वर्जित
आखिरी पानी के साथ यूरिया देने से दानों की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दाने अपेक्षाकृत नरम रह जाते हैं और उनका वजन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा, अधिक नाइट्रोजन से फसल में रोग और कीट लगने की संभावना भी बढ़ जाती है।
पोटाश का सही उपयोग
यदि इस समय दानों की चमक, मजबूती और वजन बढ़ाना है, तो एनपीके 0:0:50 या पोटैशियम सल्फेट का छिड़काव एक बेहतर विकल्प माना जाता है। पोटाश दानों को भरने में मदद करता है और उनकी गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। इसके प्रयोग से दाने मोटे, चमकदार और बाजार के मानकों के अनुरूप बनते हैं।
पोटाश का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए, ताकि पत्तियों पर दवा अच्छी तरह से अवशोषित हो सके और धूप के कारण कोई नुकसान न हो।
सिंचाई कब रोकनी है, यह जानना भी है जरूरी
सिंचाई केवल देना ही नहीं, बल्कि सही समय पर रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब गेहूं के दाने सख्त होने लगें और बालियों का रंग धीरे-धीरे हरे से पीले रंग में बदलने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि अब फसल पकने की ओर बढ़ रही है।
इस अवस्था के बाद अधिक पानी देने से दानों की गुणवत्ता खराब हो सकती है। खेत में जरूरत से ज्यादा नमी रहने पर दानों में फंगस लगने का खतरा रहता है और कटाई में भी देरी होती है। इसलिए कटाई से लगभग 10 से 15 दिन पहले सिंचाई पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, ताकि फसल अच्छे से सूख सके।
खाद के दाम और समझदारी भरा उपयोग
2026 में खाद के नए रेट सामने आने के बाद यह और भी जरूरी हो गया है कि किसान उर्वरकों का संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करें। केवल अधिक खाद डालने से ही पैदावार नहीं बढ़ती, बल्कि सही समय और सही मात्रा में खाद देना ही असली सफलता की कुंजी है।
यूरिया, डीएपी, पोटाश और एनपीके का उपयोग फसल की अवस्था को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अंतिम चरण में अनावश्यक रसायनों से बचाव करके किसान न केवल लागत कम कर सकते हैं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता वाली उपज भी प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष: बंपर पैदावार का सही मंत्र
गेहूं की बंपर पैदावार के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि सही जानकारी और समय पर लिए गए फैसले भी जरूरी हैं। दाना भरने की अवस्था में पर्याप्त नमी, शांत मौसम में सिंचाई, अंतिम चरण में यूरिया से परहेज और पोटाश का सही उपयोग आपकी फसल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
किसानों को यह समझना होगा कि आज के समय में बाजार केवल मात्रा नहीं, बल्कि गुणवत्ता को भी महत्व देता है। यदि दाने चमकदार, वजनदार और मजबूत होंगे, तो उन्हें बेहतर दाम मिलना तय है। इन वैज्ञानिक और व्यावहारिक सुझावों को अपनाकर आप अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं और 2026 में बढ़ती लागत के बावजूद अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।









