Kisan Agriculture Machine Subsidy 2026: भारत की खेती सदियों से मेहनत, मिट्टी और मौसम के भरोसे आगे बढ़ती रही है। हल-बैल से लेकर आधुनिक ट्रैक्टर तक का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन अब समय फिर करवट ले रहा है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने किसान एग्रीकल्चर मशीन सब्सिडी योजना के तहत किसानों को बड़ी राहत दी है। इस योजना के जरिए खेती में आधुनिक मशीनों को अपनाना न केवल आसान होगा, बल्कि लागत भी काफी हद तक कम होगी। सरकार का साफ संदेश है—खेती को मजबूत बनाना है तो किसान को तकनीक से जोड़ना होगा।
योजना का उद्देश्य और मूल भावना
इस स्कीम का मुख्य मकसद कृषि मशीनीकरण को गांव-गांव तक पहुंचाना है। छोटे और सीमांत किसान, जो अब तक महंगी मशीनों के कारण पीछे रह जाते थे, उन्हें बराबरी का मौका देना इस योजना की आत्मा है। पारंपरिक तरीकों में समय, श्रम और लागत तीनों ज्यादा लगते हैं। आधुनिक यंत्रों से वही काम कम समय में, कम मेहनत में और बेहतर गुणवत्ता के साथ संभव हो पाता है। सरकार चाहती है कि किसान मेहनत कम करे, उत्पादन ज्यादा पाए और आमदनी स्थिर हो।
Kisan Agriculture Machine Subsidy योजना क्या है?
यह योजना केंद्र सरकार की सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन पहल के अंतर्गत लागू की गई है। इसके तहत कृषि यंत्रों की खरीद पर कुल लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। शेष 20 प्रतिशत राशि किसान को स्वयं वहन करनी होगी। यह सहायता सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
किन कृषि यंत्रों पर मिलेगी सब्सिडी?
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें 100 से अधिक प्रकार के कृषि यंत्र शामिल किए गए हैं। बड़े यंत्रों में ट्रैक्टर, पावर टिलर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, प्लाऊ और लेजर लैंड लेवलर शामिल हैं। कटाई और मड़ाई के लिए कंबाइन हार्वेस्टर, रीपर और थ्रेशर पर भी भारी सब्सिडी दी जा रही है।
बुआई से जुड़ी मशीनों जैसे सीड ड्रिल, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल और प्लांटर को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा स्प्रेयर, पंप सेट, ड्रायर और छोटे उपकरण भी इस योजना के दायरे में आते हैं। मशीन की कीमत के अनुसार सब्सिडी राशि तय होती है, जो हजारों से लेकर लाखों रुपये तक हो सकती है।
राज्यवार लाभ और प्राथमिकता
हर राज्य अपनी कृषि परिस्थितियों के अनुसार यंत्रों की अलग सूची जारी करता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस योजना को खास तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार मशीनों का चयन संभव हो पाता है, और योजना का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचता है।
सरकार की ओर से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सब्सिडी का प्रबंध करती हैं। कुल सहायता का एक हिस्सा केंद्र देता है और बाकी राज्य सरकार वहन करती है। इसके साथ ही किसानों को मशीनों के उपयोग की ट्रेनिंग और डेमो भी मुफ्त दिए जाते हैं। इससे नई तकनीक अपनाने में डर खत्म होता है और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होती है। एससी, एसटी वर्ग, छोटे किसान और महिला किसानों को अतिरिक्त छूट और प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक कम से कम एक करोड़ किसान इस योजना से जुड़ें।
आवेदन प्रक्रिया: आसान और पारदर्शी
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है ताकि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। सबसे पहले किसान को डीबीटी पोर्टल या अपने राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करना होगा। आधार और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन कर योजना का चयन किया जाता है।
इसके बाद किसान अपनी जरूरत के अनुसार यंत्र चुनता है और जमीन से जुड़े दस्तावेज, बैंक विवरण और फोटो अपलोड करता है। आवेदन सबमिट करने के बाद एक ट्रैकिंग आईडी मिलती है, जिससे स्थिति की जानकारी मिलती रहती है। सत्यापन पूरा होने पर अधिकृत डीलर से मशीन खरीदी जाती है और बिल जमा करने के बाद सब्सिडी सीधे खाते में भेज दी जाती है।
इस योजना से किसानों को क्या लाभ होगा?
सब्सिडी मिलने से खेती की कुल लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फसल की बुआई से लेकर कटाई तक का काम तेज होगा, जिससे फसल चक्र सुधरेगा। मजदूरों पर निर्भरता घटेगी और समय पर काम पूरा होगा।
उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय में इजाफा होगा और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि आधुनिक मशीनें ईंधन और संसाधनों का बेहतर उपयोग करती हैं। छोटे किसान भी अब वही सुविधाएं पा सकेंगे जो पहले केवल बड़े किसानों तक सीमित थीं।
निष्कर्ष
Kisan Agriculture Machine Subsidy 2026 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि खेती के भविष्य की नींव है। यह किसानों को आत्मनिर्भर, सशक्त और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। जो किसान आज आधुनिक मशीन अपनाएगा, वही आने वाले कल की मजबूत खेती का आधार बनेगा। समय रहते आवेदन करें, क्योंकि यह मौका बार-बार नहीं आता। खेत वही, मिट्टी वही है—बस अब औजार बदल रहे हैं, और उन्हीं औजारों में छुपी है कल की खुशहाली।















