North India Weather Alert: उत्तर भारत में जनवरी के अंत में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। बीते कुछ दिनों तक खिली धूप और अपेक्षाकृत साफ आसमान के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका जताई जा रही है। मौसम में यह बदलाव 30 और 31 जनवरी को अधिक प्रभावी रूप से देखने को मिल सकता है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि कार्यों पर भी सीधा असर पड़ने की संभावना है।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है और इसका प्रभाव क्यों पड़ता है
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी प्रणाली है जो भूमध्य सागर और आसपास के क्षेत्रों से चलकर पाकिस्तान होते हुए उत्तर भारत तक पहुंचती है। सर्दियों के मौसम में यही प्रणाली उत्तर भारत में बारिश, बादल और कभी-कभी ओलावृष्टि का कारण बनती है। इस समय सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान और पंजाब की दिशा से आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बादलों का जमाव बढ़ गया है।
किन राज्यों में रहेगा सबसे ज्यादा असर
मौसम विभाग के ताजा संकेतों के अनुसार, इस पश्चिमी विक्षोभ का असर मुख्य रूप से पांच राज्यों में देखने को मिल सकता है। इनमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कहीं हल्की बूंदाबांदी तो कहीं मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
27–28 जनवरी से शुरू हुआ मौसम का बदलाव
23 जनवरी के बाद से उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम साफ था और दिन के समय अच्छी धूप निकल रही थी। लेकिन 26 जनवरी की दोपहर के बाद अचानक हवा की दिशा में बदलाव हुआ और पश्चिम की ओर से नमी युक्त हवाएं आने लगीं। इसके परिणामस्वरूप 27 और 28 जनवरी को आसमान में बादल छा गए और कई इलाकों में हल्की बारिश की स्थिति बनी। यही बदलाव आगे चलकर 30–31 जनवरी को अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
तापमान में गिरावट और बढ़ती ठंड
बारिश और बादलों की वजह से दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। खासतौर पर सुबह और रात के समय ठिठुरन और गलन बढ़ने की संभावना है। जिन इलाकों में पहले से ही कोहरा और ठंड का असर था, वहां यह बदलाव ठंड को और तीव्र बना सकता है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
किसानों के लिए विशेष चेतावनी और सलाह
कृषि कार्यों पर मौसम का प्रभाव
यह समय किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि रबी की फसलें इस समय महत्वपूर्ण विकास अवस्था में होती हैं। बारिश और ओलावृष्टि जहां कुछ हद तक नमी प्रदान कर सकती है, वहीं अधिक या अनियमित बारिश फसलों को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
स्प्रे और छिड़काव को लेकर सावधानी
यदि आपके क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं या अगले दो दिनों में बारिश की संभावना है, तो कीटनाशक, फफूंदनाशक या पीजीआर (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर) का छिड़काव फिलहाल टाल देना ही बेहतर होगा। बारिश के दौरान किया गया स्प्रे बह जाता है, जिससे न तो दवा का पूरा लाभ मिलता है और न ही खर्च की भरपाई हो पाती है। मौसम साफ होने के बाद ही ऐसे कार्य करना अधिक प्रभावी और सुरक्षित रहता है।
29–30 जनवरी के बाद सुधर सकता है मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 28 जनवरी के बाद यानी 29 और 30 जनवरी से मौसम में धीरे-धीरे सुधार होने की उम्मीद है। आसमान साफ होने लगेगा और धूप निकलने की संभावना बढ़ेगी। ऐसे में किसान खाद, सिंचाई और आवश्यक स्प्रे का कार्य फिर से शुरू कर सकते हैं। हालांकि, स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
प्रमुख रबी फसलों की देखभाल कैसे करें
गेहूं की फसल
गेहूं इस समय बढ़वार की अवस्था में होता है। अधिक नमी और ठंड से कुछ स्थानों पर रोगों का खतरा बढ़ सकता है। खेतों में जलभराव न होने दें और मौसम साफ होने पर ही आवश्यक पोषक तत्वों या दवाओं का प्रयोग करें।
चना और सरसों
चना और सरसों की फसल फूल और दाने बनने की अवस्था में होती है। ओलावृष्टि या तेज हवाएं इन फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यदि बारिश के बाद मौसम साफ हो जाए, तो खेतों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त हिस्सों में उचित प्रबंधन करें।
पीजीआर के उपयोग में सतर्कता
फसल की अत्यधिक बढ़वार को नियंत्रित करने के लिए पीजीआर का प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसके लिए साफ और शुष्क मौसम बेहद जरूरी होता है। बारिश या नमी की स्थिति में पीजीआर का स्प्रे न करें, क्योंकि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
अगले 48 घंटे क्यों हैं महत्वपूर्ण
आने वाले 48 घंटे उत्तर भारत के मौसम के लिहाज से काफी निर्णायक साबित हो सकते हैं। इस दौरान बारिश, तेज हवाएं और ठंड का असर एक साथ देखने को मिल सकता है। ऐसे में न केवल किसान बल्कि आम लोग भी सतर्क रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम से जुड़ी ताजा जानकारियों पर ध्यान दें।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
जनवरी के आखिरी दिनों में सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदल सकता है। बारिश और ठंड जहां एक ओर राहत और नमी ला सकती है, वहीं दूसरी ओर यह कृषि और दैनिक जीवन के लिए चुनौतियां भी खड़ी कर सकती है। किसानों के लिए यह जरूरी है कि वे मौसम के अनुसार अपने कार्यों की योजना बनाएं और किसी भी प्रकार के जोखिम से बचने के लिए समय रहते कदम उठाएं। इस जानकारी को अन्य किसान साथियों के साथ साझा करना भी फायदेमंद रहेगा, ताकि सभी लोग मिलकर संभावित नुकसान को कम कर सकें।









